Thursday, September 3, 2020

असली श्राद्ध-लेखमाला।

श्राद्ध जीवित पितरों का होता है। मृत का नहीं। पितरों की सेवा आजीवन चलती है। पर्व या दिवस विशेष पर नहीं। इसी सन्देश को देने के लिए इस लेख माला का प्रतिदिन प्रकाशन किया जायेगा।  

श्राद्ध कर्मकांड पर विभिन्न समाज सुधारकों के विचार

संत कबीर के श्राद्ध पर विचार

जब संत कबीर बालक थे तथा गुरू रामानंद के आश्रम मे शिक्षा ग्रहण कर रहे थे, तब की एक घटना है :-

ब्राहमण धर्म के अनुसार श्राद्ध मे कौओ को खाना खिलाने से मृत व्यक्ति की भूख शान्त हो जाती है ! अपने पिता के श्राद्ध के लिये गुरू रामानद ने सभी शिष्यो को अलग अलग सामग्री लाने की जिम्मेदारी दी ! बालक कबीर को खीर बनाने के लिये दूध लाने की जिम्मेदारी दी ! बालक कबीर आश्रम से दूर गाँव की ओर गये तो रास्ते में एक मरी हुई गाय दिखी ! कबीर वहीं रुक गये । इधर उधर से घास लाये। गाय को खिलाने के उद्देश्य से घास गाय के मुंह के आगे डाल दिया । बर्तन हाथ मे लेकर उसके पास बैठ गये ! दोपहर होने तक भी कबीर के नही आने पर रामानंद अपने अन्य शिष्यो के साथ कबीर की तलाश मे निकले ! गाँव की तरफ चल दिये । रास्ते में गाय के पास बैठे कबीर दिखाई दिये तो गुरू ने कहा- कबीर क्या कर रहे हो ? यहां क्यों बैठे हो ? कबीर ने कहा गुरूजी गाय के खड़ी होने का इन्तजार कर रहा हूँ , गाय खड़ी हो तो घास खाये, फिर दूध निकालू !

अन्य सारे शिष्य हँसने लगे, तब गुरू ने समझाया ---
बेटे कबीर ! मरी हुई गाय खड़ी नही हो सकती है और ना ही यह घास खायेगी । और ना ही ये दूध दे सकती है ! बालक कबीर ने कहा गुरुजी जब मरा हुआ इंसान खाना खा सकता है तो मरी हुई गाय घास क्यों नहीं खा सकती है,,, दूध क्यों नही दे सकती ?
गुरू रामानंद कबीर को गले लगाकर बोले तुम तो मेरे शिष्य नही गुरू हो ! आज आपने मुझे सच्ची और बहुत बड़ी शिक्षा दी है!

गुरु नानक के श्राद्ध पर विचार -

एक बार गुरू नानक देव जी भ्रमण करते हुए शिष्यों सहित तीर्थराज हरिद्वार गए | वहां उन्होनें देखा कि हजारों भावुक अन्ध विश्वासी श्रद्धालु लोग गंगा में खड़े होकर मरे हुए माता पिता आदि को पीनी द्वारा तर्पण व पिण्ड दान कर रहे हैं | नानक देव जी ने सोचा कि इन भोले लोगों कैसे समझाया जाय, अतः वे भी गंगा की धारा में खड़े होकर पंजाब की तरह मुहँ करके दोनों हाथों से गंगा का पानी फैंकने लगे |

स्वयं से विपरीत दिशा में जल फैकते देख लोगों को आश्चर्य हुआ तो उन्होनें नानक देव जी से पूछा महाराज ! आप ये क्या कर रहे हैं ? सरल स्वभाव नानक बोले... "भाईयो, मैं अपने खेत को पानी दे रहा हूँ |"

यह सुनकर सब लोग हंसे और नानक जी से कहने लगे... "महाराज इस प्रकार आपके खेतों में पानी पहुचना सम्भव है क्या ???"

तब महात्मा नानक देव जी बोले... "ओ भोले लोगों मेरा पानी मेरे पंजाब प्रान्त के खेतों में नहीं पहुँचेगा तो तुम्हारे मरे हुए माता पिता जो किस योनि में किस देश में और अपने कर्मानुसार क्या फल भुगत रहे हैं, उन्हें तुम्हारा ये तर्पन पिण्ड दान कैसे पहुँचेगा ???"

"अतः इस पर विचार करो और अपने जीवित माता पिता और गुरूजनों को श्रद्धा व भक्ति भाव से तृप्त करो तो तुम्हारा कल्याण होगा अन्यथा आप दुःख सागर में गोते ही खाते रहोगे |"

श्राद्ध विषय पर स्वामी दयानंद जी के विचार

पितृयज्ञ’ अर्थात् जिस में जो देव विद्वान्, ऋषि जो पढ़ने-पढ़ाने हारे, पितर माता पिता आदि वृद्ध ज्ञानी और परमयोगियों की सेवा करनी। पितृयज्ञ के दो भेद हैं एक श्राद्ध और दूसरा तर्पण। श्राद्ध अर्थात् ‘श्रत्’ सत्य का नाम है ‘श्रत्सत्यं दधाति यया क्रियया सा श्रद्धा श्रद्धया यत्क्रियते तच्छ्राद्धम्’ जिस क्रिया से सत्य का ग्रहण किया जाय उस को श्रद्धा और जो श्रद्धा से कर्म किया जाय उसका नाम श्राद्ध है। और ‘तृप्यन्ति तर्पयन्ति येन पितृन् तत्तर्पणम्’ जिस-जिस कर्म से तृप्त अर्थात् विद्यमान माता पितादि पितर प्रसन्न हों और प्रसन्न किये जायें उस का नाम तर्पण है। परन्तु यह जीवितों के लिये है मृतकों के लिये नहीं।

- सत्यार्थ प्रकाश चतुर्थ समुल्लास
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अंधविश्वास भगाओ देश बचाओ़.........

Monday, August 24, 2020

RO का पानी पीना बंद किया!

मैंने तीन महीनो से RO का पानी पीना बंद किया और फ़र्क देखा है . आज इस रिपोर्ट से कन्फर्म हो गया की दानव क्यों चाहते है विटामिन बी 12 लेवल कम हो और लोग माँसाहारी बने तथा उनके बनाये हुए साइनाइड युक्त दवाओं का सेवन करते हुए लोगो को मारा जाय
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RO WATER का षड़यंत्र

- विदेशी कंपनियों का ऐसा षड्यंत्र जिससे आज गाँव भी नहीं बचा । जिस देश में पानी बेचना पाप माना जाता है आज उस देश में पानी 20 रूपये लीटर बेचा जा रहा है । मशीनों के लिए प्रयोग होने वाला RO वाटर आज प्रत्येक घरों में पहुँच चुका है । एक फैशन सा होता जा रहा है कि हम भी RO WATER पीते हैं इसलिए वीमार नहीं पड़ेंगे ।

- पानी के अन्दर बहुत सारे मिनरल्स होते हैं लेकिन जब इनको काटरेज फ़िल्टर से पास किया जाता है तो बहुत सारे मिनरल्स ख़त्म हो जाते हैं जैसे- बी-12 ख़त्म हो गया तो आपको पता भी नहीं चलेगा । 1 लीटर RO WATER बनाने के लिए 2 लीटर पानी प्रयोग किया जाता है । 50% पानी WASTE हो जाता है ।

- सामान्यतः मानव के लिए 7 से 7.5 Ph , 200 से 250 TDS , 50 Hardness Vailue का पानी पीना चाहिए । लेकिन जहाँ पर सप्लाई का पानी ही 200 TDS, 10 HARDNESS का आ रहा हो वहां RO का क्या काम है ।

- कोई भी RO वाटर की क्वालिटी मेन्टेन नहीं करता है , सिर्फ आपको साफ़ पानी देता है और जो बोतलों में पानी मिलता है उनकी TDS लगभग 10 के आसपास होती है तथा उसमे पानी की PH बढ़ाने के लिए व मिनरल्स को मेन्टेन रखने के लिए केमिकल मिलाया जाता है ।

- जब भी आप बाहर का या नल का पानी पीते है कुछ ही दिनों में आपके पेट में दर्द रहने लग जाता है क्योंकि आपके सिस्टम को RO पानी की आदत पड़ी हुई है ।

- आप 90 % लोंगों से पूंछिये यहाँ तक कि जो RO बेचते हैं उन्हें भी पूर्ण जानकारी नहीं होती है कि पानी की गुणवत्ता क्या होती है । पडोसी के यहाँ RO है तो हमारे यहाँ क्यों नहीं ... आजकल झूठे विज्ञापनों के प्रचार व भेड़चाल में पड़कर बिना सोचे समझे RO प्रयोग करते जा रहे हैं ?

- शहर की बात जाने दीजिये अब तो गाँव में भी RO पहुँच गया है और हम पूरी तरह RO पर निर्भर होते जा रहें हैं । उनसे उसकी क्वालिटी पूंछो तो जबाब नहीं है ।

⏩ अब प्रश्न है.. कौन सा पानी पियें ..?
१. सबसे बेहतरीन पानी वारिस का होता है । आप अपने घर में पानी का टैंक बनवाएं और बारिस के दिनों में अपनी छत पर लकड़ी का कोयला व चूने को डाल दें जिससे पानी कोयले व चूने से छनकर आप के टैंक में आये । यह पानी साल भर ख़राब नहीं होगा । इस पानी को आप साल भर पीजिये पेट की विमारी नहीं होगी । आवशयकता होने पर कभी-कभी थोड़ी मात्रा में लाल दवा ( पोटेशियम परमैग्नेट ) या फिटकरी का प्रयोग कर लें अन्यथा उसकी भी जरुरत नहीं है । राजस्थान में जहाँ पर पानी की बहुत अधिक कमी है इसी तरह जल के भंडार को सुरक्षित रखकर प्रयोग किया जाता है , कोई RO का पानी नहीं पीता है ।

- देश में कितने प्रतिशत गरीव व झुग्गी में रहने वाले लोग RO का पानी पीते है ...?

२. वारिश के पानी के बाद गिलेशियर से निकली हुई नदियों का पानी है जिसमे अधिकतम खनिज तत्व व गुणवत्ता को पूर्ण करते हैं ।

३. नदियों के जल के बाद तालाव का पानी जिसमे साफ़ वारिश का जल एकत्रित होता हो जिसमे गंदगी या जानवर ना नहाते हों ।

४. फिर कुएँ का पानी जिसका सम्बन्ध वारिश के दिनों में पानी के जलस्तर बढ़ने व घटने से होता है । कुएं की सफाई बारिश से पहले गर्मियों के दिनों में बहुत जरुरी है ।

५. कुएं के पानी के बाद सप्लाई का पानी जिसे साफ़ करके , गुणवत्ता की जाँच-पड़ताल के बाद भेजा जाता है ।

६. सप्लाई के पानी के बाद सबसे ख़राब पानी RO का है जिसमे कभी भी शरीर के लिए आवश्यक खनिज तत्व नहीं मिलते हैं ।

⏩ कुतर्क :- कुछ लोग कहेंगे कि हम तो लगातार कई वर्षों से RO का पानी पी रहे है हम तो ठीक है , तो भाई जी आप जरा एक माह गाँव का या झुग्गी वालों की तरह खा-पीकर देखिये और अपनी आँतों की रोग-प्रतिरोधक क्षमता की जांच कीजिये ।

जल की कठोरता :-
अस्थाई कठोरता( Temporary Hardness ):-
कैल्शियम और मैग्नीशियम के वाईकर्वोनेट के जल में रहने के कारण होती है । इस जल को उबालकर या सोडियम कार्बोनेट मिलाकर अथवा Clark's Process द्वारा कठोरता दूर की जाती है ।
स्थाई कठोरता ( Permanent Hardness):-
इस जल को उबाल कर शुद्ध नहीं किया जा सकता है , इस जल में मैग्नीशियम और कैल्शियम के क्लोराइड और सल्फेट घुले होने के कारण इसे सोडियम कार्बोनेट मिलाने से या Permutit Process द्वारा कैलगन विधि से दूर किया जाता है ।

⏩ अगर आपको लेख पसंद आये तो इसे और भी लोंगों तक भी पहुंचाए। क्योंकि भाई राजीव दीक्षित ने इस विषय का खुलासा वर्षो पहले किया था ।