Wednesday, November 6, 2019

कलावा।

क्या आप जानते हैं कि हमारे हिन्दू परम्पराओं के अनुसार हाथ में #मौली (#कलावा) क्यों बांधा जाता है ?

आपने अक्सर देखा होगा कि घरों और मंदिरों में पूजा के बाद पंडित जी हमारी कलाई पर लाल रंग का कलावा या मौली बांधते हैं और हम में से बहुत से लोग बिना इसकी जरुरत को पहचानते हुए इसे हाथों में बंधवा लेते हैं।

सिर्फ इतना ही नहीं बल्कि, आजकल पश्चिमी संस्कृति से प्रभावित अंग्रेजी स्कूलों में पढ़े लोग #मौली बांधने को एक ढकोसला मानते हैं और, उनका मजाक उड़ाते हैं

हद तो ये है कि कुछ लोग #मौली बंधवाने में अपनी आधुनिक शिक्षा का अपमान समझते हैं एवं, #मौली बंधवाने से उन्हें अपनी सेक्यूलरता खतरे में नजर आने लगती है

परन्तु ,

आपको एक बार फिर से ये याद दिला दे कि एक पूर्णतया वैज्ञानिक धर्म होने के नाते हमारे हिंदू सनातन धर्म की कोई भी परंपरा बिना वैज्ञानिक दृष्टि से हो कर नहीं गुजरता और हाथ में #मौली धागा बांधने के पीछे भी एक बड़ा वैज्ञानिक कारण है...!

दरअसल #मौली का धागा कोई ऐसा-वैसा धागा नहीं होता है बल्कि, यह कच्चे सूत से तैयार किया जाता है और, यह कई रंगों जैसे, #लाल #काला, #पीला अथवा #केसरिया रंगों में होती है।

#मौली को लोग साधारणतया लोग हाथ की कलाई में बांधते हैं...!

और, ऐसा माना जाता है कि हाथ में #मौली का बांधने से  मनुष्य को भगवान ब्रह्मा, विष्णु व महेश तथा तीनों देवियों- लक्ष्मी, पार्वती एवं  सरस्वती की कृपा प्राप्त होती है...।

कहा जाता है कि हाथ में #मौली धागा बांधने से मनुष्य बुरी दृष्टि से बचा रहता है क्योंकि भगवान उसकी रक्षा करते हैं...!

और, इसीलिए कहा जाता है क्योंकि हाथों में #मौली धागा बांधने से मनुष्य के स्वास्थ्य में बरकत होती है कारण कि इस धागे को कलाई पर बांधने से शरीर में वात,पित्त तथा कफ के दोष में सामंजस्य बैठता है।

तथा, ये सामंजस्य इसीलिए हो पाता हैं क्योंकि शरीर की संरचना का प्रमुख नियंत्रण हाथ की कलाई में होता है (आपने भी देखा होगा कि डॉक्टर रक्तचाप एवं ह्रदय गति मापने के लिए कलाई के नस का उपयोग प्राथमिकता से करते हैं ) इसीलिए वैज्ञानिकता के तहत हाथ में बंधा हुआ मौली धागा एक एक्यूप्रेशर की तरह काम करते हुए मनुष्य को  रक्तचाप, हृदय रोग, मधुमेह और लकवा जैसे गंभीर रोगों से काफी हद तक बचाता है एवं,  इसे बांधने वाला  व्यक्ति स्वस्थ रहता है।

और, हाथों के इस नस और उसके एक्यूप्रेशर प्रभाव को ... हमारे ऋषि-मुनियों ने हजारों -लाखों साल पहले जान लिया था...!

परन्तु हरेक व्यक्ति को एक-एक कर हर बात की वैज्ञानिकता समझाना संभव हो नहीं पाता....

इसीलिए हमारे ऋषि-मुनियों ने गूढ़ से गूढ़ बातों को भी हमारी परम्परों और रीति-रिवाजों का हिस्सा बना दिया ताकि, हम जन्म-जन्मांतर तक अपने पूर्वजों के ज्ञान-विज्ञान से लाभान्वित होते रहें

जाने ... समझे और अपने आपको पहचाने हिन्दु

हम हिन्दू उस गौरवशाली सनातन धर्म का हिस्सा हैं..... जिसके एक-एक रीति-रिवाजों में वैज्ञानिकता रची-बसी है

नोट : शास्त्रों के अनुसार पुरुषों एवं अविवाहित कन्याओं को दाएं हाथ में , एवं विवाहित स्त्रियों के लिए बाएं हाथ में मौली बांधने का नियम है।
कलावा बंधवाते समय जिस हाथ में कलावा बंधवा रहे हों उसकी मुठ्ठी बंधी होनी चाहिए और, दूसरा हाथ सिर पर होना चाहिए।
हर हर महादेव

Thursday, October 24, 2019

मिठाई अवश्य खाइये।

आयुर्वेद कहता है : *मिठाई अवश्य खाइये*        
          – स्वास्थ्य वैज्ञानिक उत्तम माहेश्वरी                         

क्यों?
[1] 
भोजन में 6 रस होते हैं। इनमें मधुर रस अर्थात् मीठा, रसों का राजा है। राजा के बिना भोजन दरिद्र है।
[2] 
भोजन का सबसे महत्त्वपूर्ण गुण है मानसिक तृप्ति। मधुर रस तृप्ति देता है। अतृप्त व्यक्ति ही रोगी, कंजूस, झगड़ालू, भ्रष्टाचारी, अपराधी .... होते हैं।
[3]
80% रोग वात-पित्त की विकृति से होते हैं। मधुर रस वात-पित्त को संतुलित कर 80% रोगों से बचाता है।
[4]
मीठा टेंशन को झेलने में मदद करता है। मीठा खाने से नहीं, *मीठा न खाने से डायबिटीज हो सकती है*। डायबिटीज का सबसे बड़ा कारण है – टेंशन। सबसे अधिक डायबिटीज केरल के लोगों को है जो बहुत ही कम मिठाई खाते हैं।
[5]
70% लोगों का मोटापा वात के कारण होता है। ऐसे लोगों का *मिठाई खाने से तेजी से मोटापा कम* होता है।
सावधानी : मिठाई पर गरमागरम देशी गाय का दूध या पानी अवश्य पीयें। गरम पानी में ठंडा पानी न मिलायें।
[6]
मधुर रस Anti ageing है, बुढ़ापे का शरीर व दिमाग पर असर नहीं होने देता।
[7] 
आध्यात्मिक जीवन जीने के इच्छुकों के लिए मधुर रस विशेष लाभदायक है।

*सावधान! सावधान!! सावधान!!!*
1. शुगर मिल की शक्कर न खायें।
क्यों?
क्योंकि इसमें कई हानिकारक केमिकल होते हैं। शुगर मिल की शक्कर मीठी लगने पर भी इसका रस मधुर नहीं है। इससे डायबिटीज हो सकती है, केमिकल फ्री शक्कर से नहीं होती। 
सावधान : डायबिटीज होने के बाद मीठा खाते समय सावधानी रखना चाहिए।

2. देशी गाय के दूध के अलावा किसी भी दूध की मिठाई न खायें।
क्यों?
देशी गाय के दूध के अलावा किसी भी दूध को अधिक देर तक गर्म करने पर उसके तत्त्व (nutrients) नष्ट हो जाते हैं। देशी गाय के दूध का मावा बनने पर भी सभी तत्त्व ज्यों के त्यों रहते हैं।

3. देशी गाय के बिलौने के घी के अलावा किसी भी घी की मिठाई न खायें।
क्यों?
क्योंकि आयुर्वेद देशी गाय के बिलौने के घी को रोगनाशक और बाकी सभी घी को रोगकारक मानता है।

4. दिवाली पर सूखे मेवे dry fruits  या इनसे बनी मिठाई न खायें।
क्यों?
दिवाली शरद ऋतु में आती है। इस समय दिनभर तेज गरमी रहती है। इस ऋतु में पित्त बढ़ता है। सूखे मेवे पित्त (गरमी) को और अधिक बढ़ाते हैं।

5. दिवाली पर देशी गाय के दूध-घी की ही मिठाई खाना चाहिए।
क्यों?
देशी गाय का दूध-घी पित्त शामक है।

6. जर्सी जानवर के प्रोडक्ट्स (दूध, पनीर, चीज़, बटर, बटर ऑइल ...) नहीं खाना चाहिए।
क्यों?
इनके कारण बहुत से रोग फैले हैं। जिनमें से 3 मुख्य है - डायबिटीज, अर्थराइटिस, कैंसर।

7. डेरी का घी न खरीदें।
क्यों?
सभी डेरी हृदय के लिए घातक बटर ऑइल को ही घी के नाम से बेचती हैं। आयुर्वेद के अनुसार केवल देशी गाय के बिलौने का घी हृद्य (हृदय के लिए अत्यंत लाभदायक) है।

8. चांदी के वर्क की मिठाई न खायें।
क्यों?
क्योंकि बाजार में चांदी के वर्क के नाम पर 90% एल्युमिनियम का वर्क बिकता है, जो जहर है। शुद्ध चांदी का वर्क गाय की आँत में कूटकर बनाई जाती है। यह आँत कत्लखानों में काटी गई गाय की होती है।

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गो-सुषमा की योजना है मुम्बईकरों को अमृत पहुँचाना और अमृत देनेवाले 10000 गोवंश (गाय-बैल) को दिवाली 2020 तक गोहत्यारों से बचाकर ठाणे-पालघर के गाँवों में गोपालकों के घरों में रखवाना।