Friday, May 5, 2017

मेरी ढाई शंका!

एक चर्चित इस्लामिक स्टाल पर कुछेक लोगों की भीड़ देखकर मैं भी पहुँच गया। पता चला 'कुरान-ए-शरीफ़' की प्रति लोगों को मुफ़्त बाँटी जा रही है। शांति, प्रेम और आपसी मेलजोल को इस्लाम का संदेश बताया जा रहा था।
खैर जिज्ञासावश मैंने भी मुफ़्त में कुरान पाने को उनका दिया आवेदन फॉर्म भरने की ठानी जिसमें वो नाम-पता और मोबाइल नम्बर लिखवा रहे थे ताकि बाद में लोगों से सम्पर्क साधा जा सके।

एकाएक एक सज्जन अपनी धर्मपत्नी जी के साथ स्टाल में पधारे सामान्य अभिवादन से पश्चात उन्होंने मुस्लिम विद्वान् के सामने अपना विचार रखा - मैं अपनी धर्मपत्नी के साथ इस्लाम स्वीकार करना चाहता हूँ।

यह सुन मुस्लिम विद्वान के चेहरे पर प्रसन्नत्ता की अनूठी आभा दिखाई दी।
मुस्लिम धर्मगुरु ने अपने दोनों हाथ खोलकर कहा - आपका स्वागत है।
लेकिन उन सज्जन ने कहा - इस्लाम स्वीकार करने से पहले मेरी 'ढाई' शंका है। आपको उनका निवारण करना होगा। यदि आप उनका निवारण कर पाए तो ही मैं इस्लाम स्वीकार कर सकता हूँ!!

मुस्लिम विद्वान ने शंकित से भाव से उनकी ओर देखते हुए प्रश्न किया - महोदय, शंका या तो 'दो' हों या 'तीन'! ये 'ढाई' शंका का क्या तुक है?

सज्जन ने अपने मुस्कुराते हुए कहा - जब मैं शंका रखूँगा आप खुद समझ जायेंगे। यदि आप तैयार हो तो मैं अपनी पहली शंका आपके सामने रखूँ?
मुस्लिम विद्वान् ने कहा - जी, रखिये...

सज्जन - मेरी पहली शंका है कि सभी इस्लामिक बिरादरी के मुल्कों में जहाँ मुस्लिमों की संख्या 50 फीसदी से ज़्यादा है, मसलन 'मुस्लिम समुदाय' बहुसंख्यक हैं, उनमें एक भी देश में 'समाजवाद' नहीं है, 'लोकतंत्र नहीं है। वहाँ अन्य धर्मों में आस्था रखनेवाले लोग सुरक्षित नहीं हैं। जिस देश में 'मुस्लिम' बहुसंख्यक होते हैं वहाँ कट्टर इस्लामिक शासन की माँग होने लगती है। मतलब उदारवाद नहीं रहता, लोकतंत्र नहीं रहता। लोगों से उनकी अभिवयक्ति की स्वतंत्रता छीन-सी ली जाती है। आप इसका कारण स्पष्ट करें, ऐसा क्यों? मैं इस्लाम स्वीकार कर लूँगा!!

मुस्लिम विद्वान के चेहरे पर एक शंका ने हजारों शंकाए खड़ी कर दीं। फिर भी उन्होंने अपनी शंकाओं को छिपाते हुए कहा - दूसरी शंका प्रकट करें...
सज्जन – मेरी दूसरी शंका है, पूरे विश्व में यदि वैश्विक आतंक पर नज़र डालें तो इस्लामिक आतंक की भागीदारी 95% के लगभग है। अधिकतर मारनेवाले आतंकी 'मुस्लिम' ही क्यों होते है? अब ऐसे में यदि मैंने इस्लाम स्वीकार किया तो आप मुझे कौन-सा मुसलमान बनायेंगे? हर रोज़ जो या तो कभी मस्ज़िद के धमाके में मर जाता, तो कभी ज़रा-सी चूक होने पर पर इस्लामिक कानून के तहत दंड भोगनेवाला या फिर वो मुसलमान जो हर रोज़ बम-धमाके कर मानवता की हत्या कर देता है! इस्लाम के नाम पर मासूमों का खून बहानेवाला या सीरिया की तरह औरतों को अगवाकर बाज़ार में बेचनेवाला! मतलब में मरनेवाला मुसलमान बनूँगा या मारनेवाला?

यह सुनकर दूसरी शंका ने मानो उन विद्वान पर हज़ारों मन बोझ डाल दिया हो। दबी-सी आवाज़ में उन्होंने कहा - बाकी बची आधी शंका भी बोलो?...
सज्जन ने मंद-सी मुस्कान के साथ कहा - वो आधी शंका मेरी धर्मपत्नी जी की है... इनकी शंका 'आधी' इसलिए है कि इस्लाम नारी समाज को पूर्ण दर्जा नहीं देता। हमेशा उसे पुरुष की तुलना में आधी ही समझता है तो इसकी शंका को भी 'आधा' ही आँका जाये!

मुस्लिम विद्वान ने कुछ लज्जित से स्वर में कहा - जी मोहतरमा, फरमाइए!...
सज्जन की धर्मपत्नी जी ने बड़े सहज भाव से कहा - ये इस्लाम कबूल कर लें, मुझे इससे कोई आपत्ति नहीं किन्तु मेरी इनके साथ शादी हुए करीब 35 वर्ष हो गये। यदि कल इस्लामिक रवायतों-उसूलों के अनुसार किसी बात पर इन्हें गुस्सा आ गया और मुझे 'तलाक-तलाक-तलाक' कह दिया तो बताइए मैं इस अवस्था में कहाँ जाऊँगी? यदि तलाक भी न दिया और कल इन्हें कोई पसंद आ गयी और ये उससे निकाह करके घर ले आये तो बताइए उस अवस्था में मेरा, मेरे का बच्चों का, मेरे गृहस्थ जीवन क्या होगा? तो ये मेरी 'आधी' शंका है।

इस प्रश्न के वार से मुस्लिम विद्वान को निरुत्तर कर दिया। उसने इन जवाबों से बचने के लिए कहा - आप अपना परिचय दे सकते हैं...

सज्जन ने कहा - मेरी शंका ही मेरा परिचय है। यदि आपके पास इन प्रश्नों का उत्तर होगा, हमारी 'ढाई शंका' का निवारण आपके पास होगा तो आप मुझे बताना।

सज्जन तो वहाँ से चले गये पर मौलाना साहब सिर पकड़कर बैठे रहे। किन्तु इस सारे वार्तालाप से मेरे मन में ज़रूर एक शंका खड़ी हो गयी कि आखिर ये सज्जन कौन हैं...?

Thursday, May 4, 2017

गर्मी में खाए सत्तू? और इन 7 फायदों पर करें गौर....


गर्मी में खानपान का खास ख्याल न सिर्फ आपके शरीर के लिए बेहतर है, बल्कि आपको डॉक्टर के पास जाने से बचा सकता है. सभी जानते हैं कि गर्मी में प्यास ज्यादा लगती है और इसके लिए हम पानी से लेकर जूस, शरबत आदि का इस्तेमाल ज्यादा करते हैं. ऐसे में सत्तू आपके लिए एक विकल्प हो सकता है. काले चनों से बना सत्तू सबसे ज्यादा शरबत के तौर पर इस्तेमाल होता है. खासकर बिहार, बंगाल और उत्तर प्रदेश में रहने वाले परिवार इसका खूब इस्तेमाल करते हैं. सत्तू को और प्रभावशाली बनाने के लिए इसमें ज्वार और बाजरे का आटा भी मिलाया जाता है.
सत्तू और भूनने का महत्व
सत्तू का आटा भूने हुए चने से तैयार किया जाता है. इसका सबसे बड़ा फायदा ये होता है कि इससे सत्तू का प्रोटीन खत्म नहीं होता. शरीर को पानी से भी ज्यादा ठंडक पहुंचाता है.फिटनेस फ्रिक सत्तू की बनी ड्रिंक पीना ना भूलें. यह शरीर को पानी से भी ज्यादा ठंडक पहुंचाता है. साथ ही प्रोटीन भी देता है. इसका फायदा सबसे ज्यादा वर्कआउट के बाद होता है.
सत्तू से बनने वाले व्यंजन सत्तू शरबत ही नहीं, बल्कि कई स्वादिष्ट व्यंजन बनाने में भी काम आता है. बिहार-पूर्वांचल में सबसे लज़ी़ज़ लिट्टी में भी सत्तू भरा जाता है. सत्तू के पराठे भी ठीक उसी तरह बनते हैं जैसे हम आलू के पराठे बनाते हैं. सत्तू भरी हुई पूड़ियां भी बनती हैं. सत्तू में पहले लहसून, प्याज, हींग, जीरे आदि को मिला दिया जाता है, फिर उसे पूड़ी में भर दिया जाता है. उसके बाद पूड़ी बना दी जाती है.
बच्चों के लिए कैसे फायदेमंद सत्तू बढ़ती उम्र के बच्चों के लिए काफी फायदेमंद है. अगर सत्तू के बने आटे का स्वाद दुगना करना हो तो गुड़ का इस्तेमाल करें. जैसा हम जानते है सत्तू से शरीर को प्रोटीन, विटामिन ए, कार्बोहाईड्रेट्स, मिनरल मिलता है, इसलिए आटे में भी थोड़ी मात्रा में सत्तू का उपयोग किया जा सकता हैं.
सत्तू डायबटीज़ के मरीज़ों के लिए लाभदायक क्योंकि सत्तू में अच्छी मात्रा में आयरन, मैगनीज़, मैग्नीशियम, कम ग्लाइसेमिक और सोडियम होता है, इसलिए जानकारों की माने तो डायबटीज के मरीजों के लिए ये फायदेमंद होता है.
जब नुकसान पहुंचा सकता है सत्तू रात में सत्तू से बने व्यंजन खाने से परहेज करना चाहिए. जब भी सत्तू का शरबत पिएं तो उसे पतला रखें, ताकि ये आसानी से पच जाए. खाली पेट सत्तू शरीर के लिए सबसे लाभदायक होता है. लोग सत्तू को दूध में मिलाके पीने से भी मना करते हैं.