Wednesday, December 7, 2016

ब्रह्मचर्य।

ब्रह्मचर्य - वीर्य रक्षण - योग-साधना"।
1. वीर्य के बारें में जानकारी -
आयुर्वेद के अनुसार मनुष्य के शरीर में सात धातु होते हैं- जिनमें अन्तिम धातु वीर्य (शुक्र) है। वीर्य ही मानव शरीर का सारतत्व है।
40 बूंद रक्त से 1 बूंद वीर्य होता है।
एक बार के वीर्य स्खलन से लगभग 15 ग्राम वीर्य का नाश होता है । जिस प्रकार पूरे गन्ने में शर्करा व्याप्त रहता है उसी प्रकार वीर्य पूरे शरीर में सूक्ष्म रूप से व्याप्त रहता है।
सर्व अवस्थाओं में मन, वचन और कर्म तीनों से मैथुन का सदैव त्याग हो, उसे ब्रह्मचर्य कहते है ।।
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2. वीर्य को पानी की तरह रोज बहा देने से नुकसान -
शरीर के अन्दर विद्यमान ‘वीर्य’ ही जीवन शक्ति का भण्डार है।
शारीरिक एवं मानसिक दुराचर तथा प्राकृतिक एवं अप्राकृतिक मैथुन से इसका क्षरण होता है। कामुक चिंतन से भी इसका नुकसान होता है।
मैथून के द्वारा पूरे शरीर में मंथन चलता है और शरीर का सार तत्व कुछ ही समय में बाहर आ जाता है।
रस निकाल लेने पर जैसे गन्ना छूंट हो जाता है कुछ वैसे ही स्थित वीर्यहीन मनुष्य की हो जाती है। ऐसे मनुष्य की तुलना मणिहीन नाग से भी की जा सकती है। खोखला होता जाता है इन्सान ।
स्वामी शिवानंद जी ने मैथुन के प्रकार बताए हैं जिनसे बचना ही ब्रह्मचर्य है -
1. स्त्रियों को कामुक भाव से देखना।
२. सविलास की क्रीड़ा करना।
3. स्त्री के रुप यौवन की प्रशंसा करना।
4. तुष्टिकरण की कामना से स्त्री के निकट जाना।
5. क्रिया निवृत्ति अर्थात् वास्तविक रति क्रिया।
इसके अतिरिक्त विकृत यौनाचार से भी वीर्य की भारी क्षति हो जाती है। हस्तक्रिया आदि इसमें शामिल है।
शरीर में व्याप्त वीर्य कामुक विचारों के चलते अपना स्थान छोडऩे लगते हैं और अन्तत: स्वप्रदोष आदि के द्वारा बाहर आ जाता है।
ब्रह्मचर्य का तात्पर्य वीर्य रक्षा से है। यह ध्यान रखने की बात है कि ब्रह्मचर्य शारीरिक व मानसिक दोनों प्रकार से होना जरूरी है। अविवाहित रहना मात्र ब्रह्मचर्य नहीं कहलाता।
धर्म कर्तव्य के रूप में सन्तानोत्पत्ति और बात है और कामुकता के फेर में पडक़र अंधाधुंध वीर्य नाश करना बिलकुल भिन्न है।
मैथुन क्रिया से होने वाले नुकसान निम्रानुसार है-
* शरीर की जीवनी शक्ति घट जाती है, जिससे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है।
* आँखो की रोशनी कम हो जाती है।
* शारीरिक एवं मानसिक बल कमजोर हो जाता है।
* जिस तरह जीने के लिये ऑक्सीजन चाहिए वैसे ही ‘निरोग’ रहने के लिये ‘वीर्य’।
* ऑक्सीजन प्राणवायु है तो वीर्य जीवनी शक्ति है।
* अधिक मैथुन से स्मरण शक्ति कमजोर हो जाता है।
* चिंतन विकृत हो जाता है।
वीर्यक्षय से विशेषकर तरूणावस्था में अनेक रोग उत्पन्न होते हैं -
चेहरे पर मुँहासे , नेत्रों के चतुर्दिक नीली रेखाएँ, दाढ़ी का अभाव, धँसे हुए नेत्र, रक्तक्षीणता से पीला चेहरा, स्मृतिनाश, दृष्टि की क्षीणता, मूत्र के साथ वीर्यस्खलन, दुर्बलता, आलस्य, उदासी, हृदय-कम्प, शिरोवेदना, संधि-पीड़ा, दुर्बल वृक्क, निद्रा में मूत्र निकल जाना, मानसिक अस्थिरता, विचारशक्ति का अभाव, दुःस्वप्न, स्वप्नदोष व मानसिक अशांति।
अगर ग्रुप में किसी भाई को ये समस्याएँ हैं तो उपाय भी लिख रहा हूँ -
लेटकर श्वास बाहर निकालें और अश्विनी मुद्रा अर्थात् 30-35 बार गुदाद्वार का आकुंचन-प्रसरण श्वास रोककर करें।
ऐसे एक बार में 30-35 बार संकोचन विस्तरण करें। तीन चार बार श्वास रोकने में 100 से 120 बार हो जायेगा।
यह ब्रह्मचर्य की रक्षा में खूब मदद करेगी। इससे व्यक्तित्व का विकास होगा ही, व ये रोग भी दूर होंगे समय के साथ ।।
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3. वीर्य रक्षण से लाभ -
शरीर में वीर्य संरक्षित होने पर आँखों में तेज, वाणी में प्रभाव, कार्य में उत्साह एवं प्राण ऊर्जा में अभिवृद्धि होती है।
ऐसे व्यक्ति को जल्दी से कोई रोग नहीं होता है उसमें रोग प्रतिरोधक क्षमता आ जाती है ।
पहले के जमाने में हमारे गुरुकुल शिक्षा पद्धति में ब्रह्मचर्य अनिवार्य हुआ करता था। और उस वक्त में यहाँ वीर योद्धा, ज्ञानी, तपस्वी व ऋषि स्तर के लोग हुए ।
भगवान बुद्ध ने कहा है - ‘‘भोग और रोग साथी है और ब्रह्मचर्य आरोग्य का मूल है।’’
स्वामी रामतीर्थ ने कहा है - ‘‘जैसे दीपक का तेल-बत्ती के द्वारा ऊपर चढक़र प्रकाश के रूप में परिणित होता है, वैसे ही ब्रह्मचारी के अन्दर का वीर्य सुषुम्रा नाड़ी द्वारा प्राण बनकर ऊपर चढ़ता हुआ ज्ञान-दीप्ति में परिणित हो जाता है।
पति के वियोग में कामिनी तड़पती है और वीर्यपतन होने पर योगी पश्चाताप करता है।
भगवान शंकर ने कहा है-
'इस ब्रह्मचर्य के प्रताप से ही मेरी ऐसी महान महिमा हुई है।'
कुछ उपाय -
ब्रह्मचर्य जीवन जीने के लिये सबसे पहले ‘मन’ का साधने की आवश्यकता है।
भोजन पवित्र एवं सादा होना चाहिए।

Friday, November 4, 2016

हस्‍तमैथुन की आदत बेहद हानिकारक हो सकती है।

1 हस्‍तमैथुन की लत बुरी
कम उम्र में अक्सर लड़के विपरित लिंग के प्रति आकर्षित हो जाते हैं। इस समय अगर उन्हें उचित सलाह या यौन शिक्षा नहीं मिले तो इसके परिणाम बेहद डरावने हो सकते हैं। ऐसा ही एक कारण हस्तमैथुन भी है। इस आदत को अच्छा या बुरा नहीं कहा जा सकता। अगर आपको वाकई इसकी जरूरत महसूस होती है तो इसे किया जा सकता है। अन्यथा किसी और के दबाव में इसे करने की कोई जरूरत नहीं है। ये भी ध्यान रखें कि ये आदत लत बन जाए तो बेहद हानिकारक हो सकती है। तो चलिए बताते हैं कि हस्‍तमैथुन की लत से छुटकारा कैसे पाया जा सकता है।
2 हस्‍तमैथुन की लत के नुकसान
बहुत ज्यादा हस्तमैथुन करने से लिंग के ऊतक में चोट पहुंचती है और ये ऊतक क्षतिग्रस्त हो जाते है, जिससे लिंग के बड़े प्रकोष्ट (कार्पस केवेरनोसम) में रक्त जमा नहीं हो पता और लिंग में उत्तेजना बंद हो जाती है। कभी-कभी तो इसके कारण गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है, जिसमें व्यक्ति को उत्तेजना आना हमेशा के लिए समाप्त हो जाती है और व्यक्ति नपुंसक हो जाता है। कुछ लोगों में यही लत विवाह के बाद भी बनी रहती है और वे शर्मिंदा होते हैं। अति-उत्तेजना से लिंग को चोट भी लग सकती है और नसों पर अधिक दवाब पड़ सकता है।
3 दृढ़ संकल्प और इच्छा शक्ति
दृढ़ संकल्प से आप हस्‍तमैथुन की लत छोड़ सकते हैं। इसके साथ ही जब भी हस्तमैथुन की इच्छा हो तब अपना ध्यान किसी अन्य काम में लगा लें या कोई अच्छा साहित्य पढ़ें या फिर अपनी पसंद का कोई और काम करने लग जाएं। कुल मिलाकर अपना दिमाग कुछ सकारात्मक कामों में लगाएं।
4 ये ना हो पुरस्कार
जिस लत को आप छोड़ रहे हैं, उसी के जरिये खुद को पुरस्कृत न करें। मतलब यदि आप हस्‍तमैथुन की लत से उबर रहे हैं और 2 से 3 हफ्तों तक आपने हस्‍तमैथुन पर काबू रख लिया है तो ये न सोचें की अब इतने समय आपने इस लत पर काबू कर लिया है, जिसका पुरस्कार आप हस्तमैथुन कर, खुद को देंगे।यदि आप लत को छोड़ रहे हैं तो फिर इससे पूरी तरह बाहर आएं, खुद के लिए चोर दरवाजा बनाकर आप, खुद को धोखा ही दे रहे हैं।
5 आकर्षण वाला समय
अक्सर लालच तभी आता है जब हम कमजोर होते हैं, जब हम पर दबाव होता है या हम नाराज, या उदास होते हैं। तो आप ऐसे मौकों के लिए पहले ही एक रणनिती बना कर दिमाग में डाल लें, और इस आकर्षण वाले समय में खुद के लिए तैयार रक्षा विकल्पों में लग जाएं। जब आप इस स्थिति में खुद को व्यस्त कर लेते हैं तो इस लत से जल्द ही छुटकारा मिल जाता है।
6 देर रात को 
देर रात का समय सेक्स प्रलोभनों से भरा होने के लिए कुख्यात होता है। तो जब आप देर रात के समय खुद को इस और आकर्षित महसूस करें, तो अपने अंडरवेयर के ऊपर एक और कपड़ा पहन लें। अगर फिर भी काम न बने तो इसके ऊपर एक और कपड़ा पहन सकते हैं। हो सकता है ऐसा करने से आपकी नींद में ख़लल पड़े, लेकिन ये तरीका हस्‍तमैथुन की लत को छोड़ेने में आपकी मदद जरूर करेगा। देखिये इसके पीछे तर्क ये है कि जब आप इतने कपड़े पहन लेते हैं तो हस्‍तमैथुन की स्थिति आने से पहले वो कपड़े आपके विचारों को थामने का काम कर सकते हैं।